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Marrige


एक बडे़ से कमरे के दरवाजे पर एक लड़की फर्स्ट नाइट के लिए सजे बैड पर बैठी थी, वो कमरा बहुत खुबसूरत सजा था, पर उस लड़की के चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी उसकी आँखों में आंसू भरे थे,, जो लगातार लुढ़कते हुए उसके लहंगे पर गिरते जा रहें थे।

उसकी रोने की आवाज सिसकियां बनकर उस कमरें में गिर रही थी वो रोते हुए मन में कहती है " हमारे साथ ही यह क्यों हुआ, क्या लड़कियों की मर्जी मर्जी नही होती है, क्या वो इंसान नहीं होती है, हमें कौनसा भगवान् कठपुतली बनाकर भेजता है जिसको सभी अपनी अंगुलियों पर नचाना चाहते हैं आखिर हमारे साथ यह क्यों हुआ, हम कैसे निभाएंगे इस रिश्ते को जो सिर्फ नाम का है,,

जहाँ हम हमारा दिल इस रिश्ते में लगा ही नहीं पाएंगे फिर क्यों हमें बाधा गया इस रिश्ते से,, ।

दरसल बैड पर बैठी लड़की है आहिरा चौहान,, चौहान खानदान की छोटी बेटी,, आहिरा और माहिरा दो बहनें है आहिरा की उम्र अभी उन्नीस साल है,, आहिरा अभी शादी नहीं करना चाहती थी पर परिवार वालों की जबरदस्ती और बहन की ख्वाहिश के कारण उसको एक ऐसे इंसान से शादी करनी पड़ी जो उससे नौ साल बड़ा है।

और एक माफिया हैं जिसके लिए किसी इंसान को मारना चिंटी मारने जैसा है जिसकी मर्जी के बिना कोई सांस लेने से भी डरता है,, जिसका खौफ इंदौर ही नहीं पुरे एशिया में है,, ।

एशिया का सबसे रिचेस्ट आदमी, जिसकी एक सेंकड की किमत करोड़ो में है,, और एक ऐसा शख्स जिसकौ पकड़ने के लिए दुनिया जहान की पुलिस उसके पिछे लगी है पर आज तक उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं जुटा पाई,, ।

माहिरा चौहान,, अखंड दिलावर के भाई, अहान दिलावर से प्यार करती थी, और चौहान परिवार की पहली औलाद और सबसे लाड़ली होने की वजह से उसकै परिवार ने उसकी बात पहली बार में ही मान ली पर अहान के परिवार ने शर्त रखी की जब तक उनके बड़े बैटे की शादी नहीं होगी तब तक तो वो अहान की शादी नहीं करेंगे।

और यह शर्त दिलावर परिवार की तरफ से नहीं अखंड दिलावर की वजह से थी अखंड दिलावर ने यह शर्त रखवाई थी,, जिस पर चौहान परिवार ने आहिरा की शादी अखंड से तय कर दी।

जाने कितनी बार आहिरा ने मना किया चिल्लाया कि वो यह शादी नहीं करेगी, उसको अभी शादी नहीं करना यहाँ तक वो भागने की कोशिश भी कर चुकी थी पर जब अखंड दिलावर की नजरें किसी पर पड़ जाए तो वो उसकी आंखो से कभी ओझल नहीं हो सकता।

और अखंड ने भी यही किया था उसने आहिरा को पकड़ लिया और कंधे पर उठाकर उसने सात फेरे लिए,, आहिरा जबरदस्ती ही सही पर अंखड के साथ शादी के बंधन में बंध चुकी थी, अब वो अपने परिवार से सिर्फ नफरत करती थी।

आहिरा अपने साथ हुए बर्ताव को याद ही कर रही थी जब उसको किसी के कदमों की आहट करीब से आते सुनाई देती है और आहिरा का बदन जैसे डर से कांप जाता है वो सिकुड कर बैठ जाती है।

चरचराते हुए कमरे का दरवाजा खुलता है और झटके से बंद होता भी सुनाई देता है आहिरा का शरीर कांप जाता है उसने अपने सुर्ख होठों को अंदर की तरफ कसकर दबा लिया था उसकी मुठि्ठया अपने लहंगे पर कस चुकी थी।

उसकी बड़ी नथ उसके गहरी सांस लेने की वजह से हिल रही थी वो बंद पलके जिनसे आंसू गिर रहे थे माथे में वो छोटी लाल बिंदी,, कोई मैकअप नहीं, बिना मैकअप के भी वो कहर ढाह रही, आसमान से उतरी अफसरा भी उसकी खुबसूरती के सामने फिकी लगे।

कदमों की आहट अब उसके करीब से आने लगी थी और कोई आकर उसके करीब बैठता है आहिरा का बदन और तेज कांपने लग जाता है हल्की खुशबू जो मौगरे और गुलाब के फुलो की थी।

आहिरा की नाक में पड़ती है उस शख्स का चेहरा उसके कान के पास आता है उसकी गर्म सांसे जैसे ही आहिरा की गर्दन पर पड़ती है वैसे ही आहिरा पिछे हट जाती है।

वो शख्स आहिरा के चेहरे को देखता है जो उससे दुर चला गया था,, उसकी आंखो मे गुस्सा दिखने लगता है उसकै माथै में हल्की सिलवटें पड़ती है और उसके पतले होठों के कोने एक तरफ मुड़ जातै है।

वो आहिरा का हाथ पकड़ उसको खिंच लेता है आहिरा उसकी गोद में थी वो हैरानी से उस आदमी को देखती है उसको देखते ही एक पल को तो उसकी नजरै उस चेहरे पर ठहर जाती है

आज तक उसने ऐसा लड़का नहीं देखा था,, क्या कौई ऐसा भी हो सकता है दुनिया के सामने आज तक यह चेहरा नहीं आया था कैसा है अखंड दिलावर कौई नहीं जानता था।

हमसे दूर जाने की कोशिश ' ,, हमें गलतियां पसंद नहीं है और आप दो बार यही गलती दोहरा चुकी है एक और गलती हम बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।

उसकी शांत मगर कठोर आवाज ने आहिरा को डरा दिया,, वो खुद को शांत करती है उसका चेहरा अब भी घुघंट से ढका था।

उसकी आंखे हल्की हल्की घुंघट से बाहर आहिरा को नजर आता रही थी वो अपने होठों कौ हल्का हरकत देती है तभी उसकी आंखे बड़ी हो जाती है ।

अखंड के होठ उसके गले पर थे वो उसकी गर्दन को बेतहाशा चुमने लगा था जैसे वो कबसे इस दिन का इंतजार कर रहा था आहिरा रोकने के लिए हाथ बढाती है पर अंखड उसके हाथ पकड़ उसको बैड पर पटक देता है।

और आहिरा खुद को छुड़ा नहीं पाती वो डरते हुए मासूमियत से कहती है " हमें अभी नहीं करना,, हमें मौका दे प्लीज,, प्लीज हमारे साथ यह सब ना करे।

अखंड रूक जाता है वो गर्दन उठाकर घुंघट में छुपे चेहरे को देखते हुए कहता है " हमारी पहली सुहागरात है और हम इसमें आपकी बातें नहीं सुन सकते बाकी आपके हर हुकूम पर हमारी हा होगी पर इस मामले में आप नहीं बोल सकती,,, ।

यह कहते हुए वो उसका घुंघट उठा देता है क्योंकि अब वो उस चेहरे को देखने के लिए बेताब था जो दस साल पहले उसके दिल में खलबली मचाकर चला गया था।

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